Trending News

घर और बाहर दोनों मोर्चों पर सक्रिय महिलाएं, काम का बोझ अब भी तीन गुना, पुरुष केवल इतने मिनट करते हैं काम

घर और बाहर दोनों मोर्चों पर सक्रिय महिलाएं, काम का बोझ अब भी तीन गुना, पुरुष केवल इतने मिनट करते हैं काम

नई दिल्ली: सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ‘महिला और पुरुष 2025’ रिपोर्ट में देश में लैंगिक श्रम असमानता की तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, महिलाएं आज भी घरेलू कामकाज में पुरुषों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक समय व्यतीत करती हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, महिलाएं रोजाना औसतन 289 मिनट घरेलू कार्यों में लगाती हैं, जबकि पुरुष केवल 88 मिनट ही इस कार्य में देते हैं। हालांकि, सकारात्मक पक्ष यह है कि अब महिलाएं वेतन वाले कार्यों में भी पहले की तुलना में अधिक समय दे रही हैं, जिससे उनकी आर्थिक भागीदारी में लगातार वृद्धि हो रही है।

रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच पुरुषों द्वारा बिना वेतन वाले कार्यों में बिताए जाने वाले समय में कुछ वृद्धि हुई है, जबकि महिलाओं का वेतन वाले कार्यों में समय बढ़ा है। इसका मतलब है कि महिलाएं अब घर और बाहर दोनों जिम्मेदारियां निभा रही हैं।

श्रम बल भागीदारी दर (LFPR) में भी सुधार दर्ज किया गया है। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2022 से 2025 के बीच ग्रामीण महिलाओं की LFPR 37.5 प्रतिशत से बढ़कर 45.9 प्रतिशत हो गई है।

इसके अलावा, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग में कार्यबल जनसंख्या अनुपात पुरुषों के लिए 76.6 प्रतिशत और महिलाओं के लिए 38.8 प्रतिशत दर्ज किया गया है। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यबल भागीदारी अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि महिलाओं की बढ़ती आर्थिक भागीदारी देश के विकास के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन घरेलू कार्यों का असमान बंटवारा अब भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

CATEGORIES
Share ThisFacebook, whatsapp, teligram

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus ( )
Skip to toolbar