Trending News

देश के नए भूकंप नक्शे से हड़कंप: 75% आबादी डेंजर जोन में, हिमालय में 200 साल से शांत क्षेत्र अब तबाही ला सकता

देश के नए भूकंप नक्शे से हड़कंप: 75% आबादी डेंजर जोन में, हिमालय में 200 साल से शांत क्षेत्र अब तबाही ला सकता

नई दिल्ली: भारत सरकार द्वारा हाल ही में जारी नए भूकंपीय जोनेशन मैप ने पूरे देश में चिंता की लहर दौड़ा दी है। इस नक्शे के अनुसार, देश का 61 प्रतिशत क्षेत्र मध्यम से बहुत उच्च जोखिम वाले जोन III से VI में आ गया है, जबकि 75 प्रतिशत आबादी ऐसे इलाकों में रहती है जहां भूकंप का असर जानलेवा साबित हो सकता है। खासकर हिमालयी क्षेत्र, जो पिछले 200 वर्षों से बड़े भूकंपों से अछूता रहा है, अब ‘अल्ट्रा-हाई रिस्क’ यानी जोन VI में चिह्नित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां जमा ऊर्जा किसी भी समय विस्फोटक रूप ले सकती है, जिससे महाविनाश की आशंका है।

ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) द्वारा जनवरी 2025 से लागू ‘IS 1893 (Part 1): 2025’ कोड के तहत तैयार यह नया सीस्मिक जोनेशन मैप पुराने नक्शे से कई गुना सटीक है। पुराने मानचित्र में देश को चार जोन (II से V) में बांटा गया था, लेकिन नए मैप में पहली बार जोन VI जोड़ा गया है। यह बदलाव प्रोबेबिलिस्टिक सीस्मिक हेजर्ड असेसमेंट (PSHA) तकनीक पर आधारित है, जिसमें कंप्यूटर मॉडल्स के जरिए अगले 50 वर्षों में 2.5 प्रतिशत संभावना वाले सबसे बड़े भूकंप का अनुमान लगाया गया है।

हिमालय का पूरा इलाका—कश्मीर से अरुणाचल प्रदेश तक—अब जोन VI में शामिल है। वैज्ञानिकों के अनुसार, भारतीय प्लेट हर साल लगभग 5 सेंटीमीटर की रफ्तार से यूरेशियन प्लेट के नीचे धंस रही है, जिससे मध्य हिमालय में पिछले दो शताब्दियों से कोई बड़ा सतही विखंडन (सर्फेस ब्रेक) नहीं हुआ। इसका मतलब है कि यहां ‘लॉक्ड एनर्जी’ यानी जमा तनाव चरम पर पहुंच चुका है। यदि यह अचानक रिलीज होता है, तो 8.0 या उससे अधिक तीव्रता का भूकंप आ सकता है, जो दिल्ली-एनसीआर, देहरादून, ऋषिकेश जैसे शहरों को बुरी तरह प्रभावित करेगा।

नए नक्शे के प्रमुख खुलासे:
जोन VI (अल्ट्रा-हाई रिस्क): पूरा हिमालय, जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्य शामिल। यहां भूकंप प्रतिरोधी निर्माण के लिए सख्त मानक लागू होंगे।

जोन V (बहुत उच्च रिस्क): गुजरात, महाराष्ट्र के कुछ हिस्से, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल के तटीय क्षेत्र।
जोन III और IV: दिल्ली-एनसीआर, पंजाब, हरियाणा और मध्य भारत के बड़े हिस्से, जहां मध्यम से उच्च खतरा है।
कुल 61 क्षेत्रों को उच्च जोखिम वाले करार दिया गया, जिनमें सीमा पर बसे शहर प्रमुख हैं।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पुराने भवनों को तत्काल ‘रेट्रोफिटिंग’ (मजबूतीकरण) की जरूरत है। नई इमारतों में मजबूत नींव, अतिरिक्त स्टील और फ्लेक्सिबल डिजाइन अनिवार्य होंगे। हिंदुस्तान के संपादकीय में कहा गया है कि यह नक्शा न केवल जोखिम को कम आंकने की गलती सुधारता है, बल्कि लाखों जानें और अरबों रुपये बचाने का अवसर भी प्रदान करता है।

सरकार ने निर्देश जारी किए हैं कि सभी निर्माण कार्य अब नए कोड के अनुसार ही हों। साथ ही, जन जागरूकता अभियान चलाने और आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यदि समय रहते तैयारी की गई, तो इस संभावित तबाही को रोका जा सकता है। फिलहाल, हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोग अतिरिक्त सतर्क रहें।

CATEGORIES
Share ThisFacebook, whatsapp, teligram

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus ( )
Skip to toolbar