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क्या सच में होगा उत्तराखंड के जर्जर विद्यालयों का कायाकल्प, शिक्षा मंत्री बोले-पैसों की नहीं है कमी, बजट जारी

क्या सच में होगा उत्तराखंड के जर्जर विद्यालयों का कायाकल्प, शिक्षा मंत्री बोले-पैसों की नहीं है कमी, बजट जारी

देहरादून। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत जर्जर विद्यालयों के जीर्णोद्धार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। विभागीय स्तर पर जनपदवार क्षतिग्रस्त विद्यालयों को ए, बी, सी और डी श्रेणी में चिन्हित किया गया है। सी श्रेणी के चार जनपदों (टिहरी, पौड़ी, देहरादून और ऊधमसिंह नगर) के 10 विद्यालयों में निर्माण व मरम्मत कार्यों के लिए कार्यदायी संस्था नामित कर कुल 14 करोड़ 39 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। विभागीय मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

टिहरी जनपद

  • राजकीय इंटर कॉलेज नकुर्ची (2.77 करोड़)

  • राजकीय इंटर कॉलेज न्यूली अकरी (1.59 करोड़)

  • राजकीय इंटर कॉलेज लम्बगांव (2.53 करोड़)

  • राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पिन्सवाड़ (2.35 करोड़)

देहरादून

  • राजकीय इंटर कॉलेज जस्सोवाला (3 करोड़)

ऊधमसिंह नगर

  • राजकीय इंटर कॉलेज बरहैनी (96 लाख)

  • राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पूरनपुर (59 लाख)

  • राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जगदीशपुर, गदरपुर (15 लाख)

पौड़ी

  • राजकीय इंटर कॉलेज सिलोगी, द्वारीखाल (43 लाख)

इन कार्यों की जिम्मेदारी टिहरी व देहरादून में सिंचाई विभाग तथा ऊधमसिंह नगर और पौड़ी में ग्रामीण निर्माण विभाग को दी गई है।

इन विद्यालयों में कक्षा-कक्ष, आर्ट एंड क्राफ्ट कक्ष, वैकल्पिक विषय कक्ष, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, एमडीएम किचन, शौचालय तथा पुराने भवनों की मरम्मत की जाएगी।

इसके अलावा, डी श्रेणी में चिन्हित हरिद्वार, अल्मोड़ा और नैनीताल के 6 विद्यालयों में भी निर्माण कार्य हेतु कार्यदायी संस्था नामित कर दी गई है। इनमें –

  • हरिद्वार: राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गुलाबशाहपीर, राजकीय बालिका इंटर कॉलेज भगवानपुर, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मानकचौक (नारसन), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मानकपुर आदमपुर।

  • नैनीताल: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय।

  • अल्मोड़ा: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जाख।

ग्रामीण निर्माण विभाग और कृषि मंडी को इन कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक विद्यार्थी को सुरक्षित और आधुनिक विद्यालयीन भवन उपलब्ध कराना है।

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