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उत्तराखंड : दीपक बिजल्वाण के खिलाफ कौन रच रहा साजिश?

उत्तराखंड : दीपक बिजल्वाण के खिलाफ कौन रच रहा साजिश?

देहरादून : विधानसभा सीट को लेकर भाजपा के अंदर चल रहा घमासान अब खुलकर सामने आ गया है। 2027 के विधानसभा चुनाव से काफी पहले ही पार्टी के कुछ कार्यकर्ता और नेता हाल ही में भाजपा में शामिल हुए दीपक बिजल्वाण के खिलाफ दुष्प्रचार में जुटे हुए हैं। सूत्रों के अनुसार, यह विवाद मुख्य रूप से टिकट की दावेदारी से जुड़ा है, जहां बिजल्वाण की मजबूत लोकप्रियता पुराने दावेदारों के लिए चुनौती बन रही है।

दीपक बिजल्वाण पूर्व में उत्तरकाशी जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके कार्यकाल में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे, लेकिन नैनीताल हाईकोर्ट ने सभी मामलों में उन्हें क्लीन चिट दे दी है। इसी आधार पर 2025 के पंचायत चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने उन्हें पार्टी में शामिल किया था। पार्टी सूत्र बताते हैं कि बिजल्वाण का स्थानीय स्तर पर अच्छा जनाधार है, जिससे यमुनोत्री सीट पर उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है।

हालांकि, उनके भाजपा में आते ही कुछ मौजूदा टिकट दावेदारों में बेचैनी बढ़ गई। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यमुनोत्री से दावेदारी कर रहे कुछ नेता अपनी स्थिति कमजोर होते देख बिजल्वाण को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। ताजा विवाद प्रसिद्ध समाजसेवी रोशन रतूड़ी से जुड़ा है। रतूड़ी को कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने पुराने घोटाले के अधूरे दस्तावेज भेजे, जिसके आधार पर उन्होंने एक वीडियो बनाया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे सबसे पहले पार्टी के ही कुछ कार्यकर्ताओं ने शेयर किया।

इससे बिजल्वाण के विरोधियों को मौका मिला और उन्होंने इसे भुनाने की कोशिश की। लेकिन रोशन रतूड़ी ने मामले की गहराई से जांच की तो हाईकोर्ट का क्लीन चिट वाला आदेश सामने आया। इसके बाद रतूड़ी ने दूसरा वीडियो जारी किया, जिसमें उत्तरकाशी भाजपा जिला अध्यक्ष नागेंद्र सिंह के लेटरहेड पर लिखा एक पत्र भी दिखाया गया, जो बिजल्वाण की निर्दोषता की पुष्टि करता है।

पार्टी के अंदर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर दीपक बिजल्वाण के आने से किसे परेशानी हो रही है? क्या यह सिर्फ व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा है या चुनाव से पहले पार्टी को कमजोर करने की कोशिश? भाजपा के स्थानीय नेताओं का कहना है कि इस मामले की पार्टी स्तर पर जांच हो रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है, जिसमें निलंबन या निष्कासन शामिल है।

 

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