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वार ऑफ ‘खानपुर’ फिर शुरू, ‘चैंपियन’ बोले–“खानपुर का असली विधायक धामी है, कोई और नहीं”, उमेश ने दिया जवाब

वार ऑफ ‘खानपुर’ फिर शुरू, ‘चैंपियन’ बोले–“खानपुर का असली विधायक धामी है, कोई और नहीं”, उमेश ने दिया जवाब

हरिद्वा : खानपुर की सियासत में फिर से ज्वाला भड़क उठी है। जेल से रिहा होने के बाद पूर्व विधायक कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ एक बार फिर अपने पुराने अंदाज़ में नजर आये हैं। इस बार भी उनके निशाने पर रहे विधायक उमेश कुमार। हालांकि, उन्होंने सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन सोशल मीडिया पर जारी वीडियो में उनके तीर बड़ी सफ़ाई से उमेश कुमार की ओर ही छोड़े गए।

चैंपियन का कहना है कि खानपुर का सच्चा विधायक मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हैं, और किसी और को इस क्षेत्र के विकास का श्रेय नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने ये भी मांग रखी कि प्रस्तावित सिडकुल की नींव खुद सीएम रखें, लेकिन मौजूदा विधायक मंच पर न हों। चैंपियन ने जोर देकर कहा कि “जनता ने 2024 के लोकसभा चुनाव में इस व्यक्ति को नकारा है। 38 हजार से गिरकर 16 हजार वोट पर आ जाना सब कुछ कह देता है।”

इस राजनीतिक घमासान में चैंपियन की पत्नी देवयानी सिंह भी पीछे नहीं रहीं। उन्होंने 13 फरवरी को मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सिडकुल की स्वीकृति पर रोक लगाने की मांग की थी। उनका तर्क था कि सिडकुल की मांग चैंपियन ने वर्षों से की थी, और इसका श्रेय किसी और को नहीं दिया जाना चाहिए।

वहीं, दूसरी ओर, विधायक उमेश कुमार ने भी चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि “पूर्व विधायक क्षेत्र के विकास में रोड़े अटका रहे हैं। सिडकुल और अस्पताल जैसी योजनाएं रोकने की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन जनता सब देख रही है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2022 के विधानसभा चुनाव में वो निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर विजयी हुए, जबकि चैंपियन की पत्नी बीजेपी के टिकट पर भी नहीं जीत सकीं।

इस जुबानी जंग की जड़ 2022 के चुनाव हैं, लेकिन तल्ख़ी ने असली रूप 2024 में पकड़ा, जब 25 जनवरी को दोनों नेताओं के बीच सोशल मीडिया पर भिड़ंत के बाद घटनाएं सड़कों तक आ पहुंचीं। उमेश कुमार समर्थकों के साथ चैंपियन के निवास पर पहुंचे, और अगले ही दिन चैंपियन अपने समर्थकों संग उमेश कुमार के कार्यालय पहुंचे और कथित रूप से फायरिंग की। इसके बाद मुकदमे दर्ज हुए, गिरफ्तारियां हुईं और चैंपियन को 51 दिन जेल में रहना पड़ा।

अब जब वो बाहर आए हैं, तो पुराने तेवर के साथ फिर से मैदान में कूद पड़े हैं। सवाल अब यही है कि सिडकुल किसका मुद्दा है, श्रेय किसे मिलेगा और जनता अगली बार किसे असली जनप्रतिनिधि मानेगी। खानपुर की फिजा गरम है, और यहां की सियासत में हर दिन एक नया मोड़ आता दिख रहा है।

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