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अक्षय तृतीया पर 12 बजकर 35 मिनट पर खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट 

अक्षय तृतीया पर 12 बजकर 35 मिनट पर खुलेंगे यमुनोत्री धाम के कपाट 

खरसाली। उत्तराखंड के प्रसिद्ध चारधामों में शामिल यमुनोत्री धाम के कपाट आगामी 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। कपाट खुलने का शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 35 मिनट पर कर्क लग्न, कृतिका नक्षत्र और आयुष्मान योग में निर्धारित किया गया है।

यह शुभ मुहूर्त मंगलवार को यमुना जयंती के अवसर पर मां यमुना के शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव में यमुनोत्री मंदिर समिति की अगुवाई में निकाला गया। मंदिर समिति के प्रवक्ता पुरुषोत्तम उनियाल के अनुसार, कपाट खुलने से पहले मां यमुना की डोली सुबह 8:45 बजे खरसाली गांव से रवाना होगी। पारंपरिक वाद्ययंत्रों और जयकारों के बीच यह डोली यमुनोत्री धाम पहुंचेगी।

इस दौरान मां यमुना के भाई शनिदेव मंदिर सोमेश्वर की डोली भी बहन को विदा करने के लिए साथ जाएगी, जो इस परंपरा का विशेष हिस्सा है। इसी दिन गंगोत्री धाम के कपाट भी श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, जिसकी तिथि पहले ही तय की जा चुकी है।

यमुनोत्री धाम का महत्व

यमुनोत्री धाम चारधाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है। यह पवित्र स्थल समुद्र तल से लगभग 3,293 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यमुना नदी का उद्गम कालिंदी पर्वत (लगभग 4,421 मीटर) से माना जाता है, जबकि गंगा का उद्गम गोमुख (लगभग 3,892 मीटर) से होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यमुना को भगवान सूर्य की पुत्री और यमराज की बहन माना जाता है। पद्म पुराण में यमुना को पाप नाशिनी और कल्याणकारी बताया गया है। मान्यता है कि यमुना के जल में स्नान करने से व्यक्ति को पापों से मुक्ति मिलती है।

खरसाली में होता है शीतकालीन प्रवास

सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण यमुनोत्री धाम के कपाट बंद होने के बाद मां यमुना की पूजा खरसाली गांव में ही छह माह तक की जाती है। यहां मां यमुना को बेटी का दर्जा दिया गया है। कपाट बंद होने पर उनका स्वागत मायके आई बेटी की तरह किया जाता है और कपाट खुलने पर विदाई भी उसी भाव से दी जाती है।

यात्रा से बढ़ती है स्थानीय अर्थव्यवस्था

यमुनोत्री यात्रा शुरू होते ही चरासू, डामटा, बड़कोट और जानकीचट्टी जैसे पड़ावों पर होटल, ढाबे और अन्य व्यवसाय फिर से सक्रिय हो जाते हैं। यात्रा मार्ग पर घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी संचालकों की आजीविका भी इसी यात्रा पर निर्भर रहती है। कपाट खुलने की तिथि नजदीक आते ही स्थानीय व्यापारियों और लोगों में उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है।

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