
उत्तराखंड: सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा को लेकर SOP जारी, बनाए गए सख्त नियम
उत्तराखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कार्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एक व्यापक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है। यह SOP मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन द्वारा 25 फरवरी 2026 को गृह अनुभाग-5 के माध्यम से सभी अपर मुख्य सचिवों, प्रमुख सचिवों, विभागाध्यक्षों और कार्यालयाध्यक्षों को जारी किया गया है।
यह कदम हाल ही में सरकारी अधिकारियों पर हुई हिंसक घटनाओं, विशेष रूप से प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौटियाल पर कथित हमले के बाद उठाया गया है, जिसके बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्य सचिव को ऐसी SOP तैयार करने के निर्देश दिए थे।
SOP का मुख्य उद्देश्य
सरकारी कार्यस्थलों पर लोक सेवकों को बाहरी आक्रामकता, हिंसा या अनावश्यक दबाव से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। यह SOP उत्तराखंड के सभी सरकारी कार्यालयों (निदेशालयों, जिलाधिकारी परिसरों, खंड विकास कार्यालयों, शैक्षणिक एवं चिकित्सा संस्थानों आदि) पर लागू होगी, हालांकि सचिवालय और विधानसभा जैसे पहले से सुरक्षित स्थानों पर यह लागू नहीं होगी।
प्रमुख प्रावधान
परिधि सुरक्षा और प्रवेश नियंत्रण:
- सभी कर्मचारियों के लिए टैम्पर-प्रूफ आईडी कार्ड पहनना अनिवार्य।
- आम जनता के वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित; VIP या दिव्यांग वाहनों की अंडर-व्हीकल मिरर से सघन जांच के बाद अनुमति।
- डोर फ्रेम मेटल डिटेक्टर (DFMD), फ्रिस्किंग और ब्लैक लिस्टेड व्यक्तियों के लिए “नो एंट्री” रजिस्टर अनिवार्य।
आगंतुक प्रबंधन:
- डिजिटल विजिटर मैनेजमेंट सिस्टम (VMS) या रजिस्टर में उच्च रिजॉल्यूशन फोटो, आधार/वोटर आईडी सत्यापन।
- QR/RFID बैज जारी, जो केवल निर्दिष्ट क्षेत्र तक सीमित।
- वरिष्ठ अधिकारियों से मिलने के लिए पूर्व अपॉइंटमेंट जरूरी, बिना अपॉइंटमेंट वाले को प्रवेश द्वार से वापस किया जाएगा।
बैठक और जन-प्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल:
- जन शिकायत सुनवाई के लिए निर्धारित समय।
- आम जनता के प्रतिनिधिमंडल में अधिकतम 2 व्यक्ति; 2 से ज्यादा होने पर कॉन्फ्रेंस रूम (CCTV युक्त) में बैठक।
- निर्वाचित प्रतिनिधियों के साथ अधिकतम 3 व्यक्ति (प्रतिनिधि सहित)।
- VIP के सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों को हथियार रिसेप्शन पर घोषित करना और प्रतीक्षालय में रहना।
सुरक्षा अवसंरचना:
- HD CCTV कैमरे (ऑडियो रिकॉर्डिंग सहित) प्रवेश द्वारों, गलियारों और अधिकारियों के कक्षों में; फुटेज 3 महीने तक सुरक्षित।
- साइलेंट पैनिक अलार्म अधिकारियों की डेस्क और रिसेप्शन पर।
घटना के बाद कार्रवाई:
- घटनास्थल सील, CCTV फुटेज सुरक्षित उपलब्ध।
- घायलों को मेडिको-लीगल केस में इलाज।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में FIR; जांच इंस्पेक्टर स्तर से, 2 महीने में पूरी।
- आगंतुकों के लिए दिशा-निर्देश (Do’s & Don’ts):
- शिष्ट भाषा, कोई शोर-शराबा/नारेबाजी नहीं।
- अधिकारी कक्ष में एक समय में अधिकतम 2 व्यक्ति।
- हथियार, लाठी, ज्वलनशील पदार्थ, स्याही आदि प्रतिबंधित।
- वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पूर्व अनुमति।
- दुर्व्यवहार पर तत्काल FIR और निष्कासन।
यह SOP सभी प्रमुख स्थानों पर चस्पा की जाएगी, जिसमें आचार संहिता, दंडात्मक कार्रवाई और संपर्क विवरण शामिल होंगे। विभागीय सचिव आवश्यकतानुसार पंजीकृत एजेंसियों से सुरक्षा कर्मी तैनात कर सकेंगे। उच्च जोखिम वाले कार्यालयों में वार्षिक सुरक्षा ऑडिट भी संभव।
मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि सभी विभाग इस SOP के अनुसार तत्काल आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करें, ताकि सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा और कार्यस्थल पर अनुशासन बना रहे। यह कदम सरकारी मशीनरी की गरिमा और कार्यक्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

