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“गर्व, स्नेह और आशीर्वाद – जब पीएम मोदी ने सीएम धामी को दिया अपनत्व का एहसास”

“गर्व, स्नेह और आशीर्वाद – जब पीएम मोदी ने सीएम धामी को दिया अपनत्व का एहसास”

  • प्रदीप रावत ‘रवांल्टा’ 

तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, ये समय को थाम लेने वाली कहानियाँ होती हैं। कुछ ऐसा ही एहसास दिलाती है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की यह तस्वीर। एक तरफ मुख्यमंत्री धामी श्रद्धा और विनम्रता से प्रधानमंत्री को प्रणाम कर रहे हैं, तो दूसरी ओर नरेंद्र मोदी का स्नेहिल स्पर्श उनके सिर पर आशीर्वाद की तरह उतर रहा है।

लेकिन सिर्फ यह दृश्य नहीं, पीएम मोदी की आँखों में तैरते भाव इस तस्वीर को खास बना रहे हैं। उनके चेहरे पर एक अभिभावक का गर्व छलक रहा है—जैसे कोई पिता अपने होनहार बेटे को निहार रहा हो। उनके मन में संतोष है, विश्वास है कि उनका यह शिष्य सही राह पर है, और भावनाओं का एक गहरा समंदर भी है, जो शब्दों से नहीं, बल्कि उनके चेहरे की झलकियों से बह रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी का उत्तराखंड से यह स्नेह कोई नया नहीं है। यह रिश्ता केवल सत्ता या योजनाओं का नहीं, बल्कि आत्मिक जुड़ाव का है। जब केदारनाथ आपदा आई थी, तब भी वे हिमालय की इस धरा से कटे नहीं, बल्कि इस भूमि को संवारने के लिए हर संभव प्रयास करते रहे। उन्होंने इसे सिर्फ एक तीर्थ नहीं, बल्कि विश्व पर्यटन के मानचित्र पर एक चमकता सितारा बनाने की ठानी। बद्रीनाथ और केदारनाथ के पुनर्निर्माण की बात हो, या फिर सीमांत गांवों को ‘आखिरी नहीं, पहला गांव’ बनाने की सोच—हर योजना के मूल में उनका उत्तराखंड प्रेम साफ झलकता है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह तेरहवां दौरा उत्तराखंड की उन वादियों में विकास की गूंज को और ऊँचा कर गया है। जब वह उत्तराखंड आते हैं, तो ऐसा लगता है जैसे कोई बेटा अपनी मातृभूमि की गोद में लौट रहा हो। मुख्यमंत्री धामी को मिले उनके इस आशीर्वाद ने यह संदेश दिया कि उत्तराखंड को आगे बढ़ाने के लिए एक मजबूत संकल्प की जरूरत है, और वह संकल्प उन्होंने धामी के कंधों पर रख दिया है।

यह तस्वीर सिर्फ एक राजनीतिक क्षण नहीं, बल्कि समर्पण, सम्मान और उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की एक झलक है। एक ऐसा भविष्य, जहां पहाड़ों की हर घाटी में विकास की नदियाँ बहेंगी और हर गांव, हर बस्ती खुद को देश के स्वर्णिम कल का हिस्सा महसूस करेगी।

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