Trending News

पीपलकोटी टनल हादसा: 7 मजदूरों की मौत, 3 की तलाश जारी

पीपलकोटी टनल हादसा: 7 मजदूरों की मौत, 3 की तलाश जारी

चमोली। उत्तराखंड के चमोली जिले में विष्णुगाड–पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन टनल में गुरुवार शाम हुए भीषण हादसे में अब तक 7 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 3 मजदूरों की तलाश जारी है। टनल में अचानक भारी मात्रा में पानी, पत्थर और मलबा घुसने से वहां काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हादसे के बाद से ही एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं।

जानकारी के अनुसार हादसा गुरुवार शाम करीब 6:10 बजे पीपलकोटी-मायापुर क्षेत्र में परियोजना की निर्माणाधीन टीआरटी (टेल रेस टनल) में हुआ। बताया गया कि मजदूर टनल के भीतर सरिया वेल्डिंग और अन्य निर्माण कार्य में जुटे थे। इसी दौरान कार्यस्थल से करीब 150 मीटर दूर अचानक भारी भूस्खलन हुआ। भूस्खलन के साथ तेज गति से पानी, पत्थर और मलबा टनल के भीतर आ गया। अचानक आए सैलाब से मजदूरों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और कई मजदूर टनल के अंदर फंस गए।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे के समय टनल में करीब 28 मजदूर मौजूद थे। देर रात तक चले रेस्क्यू अभियान में 22 मजदूरों को बाहर निकाला गया, जिनमें नौ की मौत हो चुकी है। घायलों को जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया, जबकि गंभीर हालत वाले एक घायल को श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर किया गया। छह मजदूर अभी भी टनल के भीतर बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश के लिए रेस्क्यू अभियान लगातार जारी है।

गले तक भरा पानी और मलबा

रेस्क्यू टीमों के लिए टनल के भीतर का हाल बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बताया गया कि सुरंग का बड़ा हिस्सा पानी और मलबे से भर गया है और कई स्थानों पर पानी गले तक पहुंच गया है। एनडीआरएफ की टीमों ने रात करीब 10 बजे टनल के भीतर प्रवेश कर खोज एवं बचाव अभियान शुरू किया। पानी के बीच आगे बढ़ने के लिए जवानों ने नीले ड्रमों का भी सहारा लिया।

एनडीआरएफ टीम के कमांडर अमृत लाल मीणा के अनुसार, टीम के मौके पर पहुंचने के समय टनल में काफी पानी भरा हुआ था और किनारों से भी लगातार पानी रिस रहा था। इसके बाद पानी का स्तर और बढ़ गया, जिससे रेस्क्यू अभियान में मुश्किलें बढ़ीं।

गोपेश्वर अस्पताल में सात को मृत घोषित किया गया

गोपेश्वर जिला अस्पताल के चिकित्सकों के मुताबिक टीएचडीसी से कुल 19 लोगों को अस्पताल लाया गया था। इनमें से सात को चिकित्सकों ने मृत घोषित किया। 13 लोग अस्पताल पहुंचे थे, जिनमें 10 को भर्ती किया गया, जबकि एक घायल की हालत अस्थिर होने पर उसे श्रीनगर बेस अस्पताल रेफर किया गया। बाद की जानकारी में मृतकों की संख्या बढ़कर नौ बताई गई है।

कई राज्यों के मजदूर फंसे

हादसे में अलग-अलग राज्यों के मजदूरों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। घायल मजदूर सुनील दीवान, निवासी छत्तीसगढ़, ने अस्पताल में बताया कि वह टनल में सरिया बांधने का काम कर रहे थे। उनके अनुसार उस समय टनल में करीब 16-17 लोग मौजूद थे। अचानक करीब 150 मीटर दूर भूस्खलन हुआ और पानी, पत्थर तथा मलबा तेज गति से टनल के भीतर आ गया।

राहत-बचाव में जुटीं कई एजेंसियां

घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना, सीआईएसएफ, डीडीआरएफ और फायर सर्विस की टीमें मौके पर पहुंचीं। भारी मशीनरी और विशेष उपकरणों की मदद से मलबा हटाने तथा टनल में फंसे मजदूरों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। जिलाधिकारी चमोली मौके पर रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। घायलों के बेहतर उपचार के लिए बेस अस्पताल श्रीनगर और एम्स ऋषिकेश को भी अलर्ट पर रखा गया है।

सीएम धामी ने झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से की बात

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे को लेकर झारखंड और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बातचीत की और प्रभावित श्रमिकों की स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सभी प्रभावित मजदूरों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। जरूरत पड़ने पर घायलों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर करने की समुचित व्यवस्था भी की जाएगी। मुख्यमंत्री शुक्रवार को स्वयं घटनास्थल का जायजा लेने चमोली पहुंचेंगे।

राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि.) ने भी घटना पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव से बातचीत कर राहत एवं बचाव कार्यों की जानकारी ली।

टीएचडीसी ने जांच और हरसंभव मदद का भरोसा दिया

टीएचडीसी के प्रोजेक्ट निदेशक शरद कुमार ने हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि सभी फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना प्राथमिकता है। कंपनी के सभी उपलब्ध संसाधनों को राहत एवं बचाव कार्य में लगाया गया है। उन्होंने प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने और घटना की विस्तृत जांच कराने की बात कही है।

पिछले साल भी हुआ था हादसा

गौरतलब है कि इसी परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में पिछले वर्ष 31 दिसंबर की देर रात दो लोको ट्रेनें आपस में टकरा गई थीं। हादसे में करीब 60 अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे। उस समय सुरंग में 100 से अधिक लोग काम कर रहे थे। हादसे के बाद निर्माण कार्य भी लंबे समय तक प्रभावित रहा था।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती टनल के भीतर फंसे छह मजदूरों तक पहुंचना है। रेस्क्यू टीमें पानी और मलबे के बीच लगातार अभियान चला रही हैं और प्रशासन की नजरें अब इस अभियान के नतीजे पर टिकी हैं।

CATEGORIES
Share ThisFacebook, whatsapp, teligram

COMMENTS

Wordpress (0)
Disqus ( )