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उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: लालढांग-चिल्लरखाल सड़क को मिली मंजूरी, 18 गांवों को ऑल वेदर कनेक्टिविटी

उच्चतम न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला: लालढांग-चिल्लरखाल सड़क को मिली मंजूरी, 18 गांवों को ऑल वेदर कनेक्टिविटी

देहरादून/कोटद्वार: वर्षों से लंबित लालढांग-चिल्लरखाल मोटर मार्ग के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण को लेकर उच्चतम न्यायालय ने आज महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। टी.एन. गोदावर्मन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में आज (12 फरवरी 2026) पारित आदेश के तहत न्यायालय ने इस 11.5 किलोमीटर लंबी सड़क के निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी है। इस फैसले से कोटद्वार क्षेत्र के लगभग 18 गांवों और 40,000 से अधिक आबादी को सभी मौसमों में बेहतर सड़क संपर्क मिलेगा।

इस सड़क का करीब 4.7 किलोमीटर हिस्सा केंद्रीय वन क्षेत्र से गुजरता है, जिसके कारण पर्यावरणीय नियमों और वन संरक्षण कानूनों के तहत निर्माण कार्य लंबे समय से रुका हुआ था। उच्चतम न्यायालय के इस सकारात्मक फैसले ने क्षेत्र के विकास के रास्ते में बड़ी बाधा को दूर कर दिया है।

उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष एवं कोटद्वार विधायक श्रीमती ऋतु खण्डूड़ी भूषण ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “यह सिर्फ एक सड़क का निर्माण नहीं है, बल्कि कोटद्वार और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए जीवनरेखा साबित होगी। पिछले चार वर्षों से मैं इस मुद्दे पर लगातार प्रयासरत थी। शासन स्तर पर निरंतर संवाद, विभागीय समन्वय और उच्चतम न्यायालय में प्रभावी पैरवी के कारण ही आज यह ऐतिहासिक फैसला आया है।”

श्रीमती खण्डूड़ी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सांसद अनिल बलूनी, संबंधित विभागों के अधिकारियों और क्षेत्र की जनता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सड़क न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी, बल्कि व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं में भी नई गति लाएगी। क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के लिए उनका संकल्प जारी रहेगा।

स्थानीय निवासियों में इस फैसले से खुशी की लहर है। लंबे इंतजार के बाद अब बेहतर कनेक्टिविटी से रोजगार, बाजार पहुंच और आपातकालीन सेवाओं में सुधार की उम्मीद जगी है। राज्य सरकार अब सड़क के कार्य को तेजी से शुरू करने की तैयारी में है।

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