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बड़ा सवाल…हाकम किसके भरोसे दे रहा था नौकरी का लालच?

बड़ा सवाल…हाकम किसके भरोसे दे रहा था नौकरी का लालच?

देहरादून: उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की स्नातक स्तरीय परीक्षा के ठीक एक दिन पहले कुख्यात नकल माफिया हाकम सिंह रावत एक बार फिर सलाखों के पीछे पहुंच गया। विशेष कार्य बल (STF) और स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) ने शनिवार को देहरादून से हाकम को गिरफ्तार किया। यह गिरफ्तारी न केवल नकल गैंग के नेटवर्क पर फिर से पुलिस का शिकंजा कसने का संकेत देती है, बल्कि कई सवाल भी खड़े करती है, आखिर हाकम किसके भरोसे युवाओं को नौकरी का झांसा दे रहा था? उसके संपर्कों की जड़ें कहां-कहां फैली हुई हैं?

हाकम सिंह रावत उत्तराखंड के सबसे बड़े पेपर लीक कांडों का मास्टरमाइंड माना जाता है। 2021 की स्नातक स्तरीय परीक्षा, वन दरोगा भर्ती, सचिवालय रक्षक और ग्राम पंचायत विकास अधिकारी परीक्षाओं में धांधली के कई मामले उसके नाम से जुड़े हैं। 2022 में हिमाचल बॉर्डर पर गिरफ्तार होने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत पाने के बावजूद, उसकी गतिविधियां रुकी नहीं थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जमानत पर रहते हुए भी हाकम सक्रिय था और युवाओं को नौकरी के नाम पर ठग रहा था।

दोहरी रणनीति: पेपर लीक से लेकर सेटिंग तक

हाकम सिंह की गिरफ्तारी से पहले भी उसके दो तरीकों से नौकरी का लालच देने के मामले सामने आ चुके हैं। पहला, प्रकाशकों और प्रिंटिंग कंपनियों के साथ मिलकर पेपर लीक कराना। दूसरा, विभिन्न विभागों के अधिकारियों से सांठ-गांठ करके सीधी नौकरी लगवाने का दावा। एसटीएफ के अनुसार, हाकम ने सांकरी (उत्तरकाशी) में अपने गेस्ट हाउस को नकल का अड्डा बनाया था, जहां अभ्यर्थियों को ठहराकर पेपर लीक करवाया जाता था। इसके अलावा, उसके नेटवर्क में प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारी, आयोग के अधिकारी और मध्यस्थ शामिल थे।

पिछले दो वर्षों में एसटीएफ ने हाकम केस में 56 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें सैयद सादिक मूसा, योगेश्वर राव, शशिकांत, बलवंत रौतेला जैसे नाम प्रमुख हैं। गैंगस्टर एक्ट के तहत 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, और छह लोगों की संपत्ति अटैच की गई है। लेकिन जमानत के बाद हाकम की फिर से सक्रियता ने सवाल उठाए हैं—क्या उसने अधिकारियों तक अपनी पैठ दोबारा बना ली? क्या प्रेस कर्मचारियों के जरिए पेपर लीक का खतरा अभी भी मंडरा रहा है?

बड़े सवाल: हाकम के ‘सहयोगी’ कौन?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाकम सिंह युवाओं को किसके भरोसे नौकरी का आश्वासन दे रहा था? क्या उसके संपर्क में आयोग के उच्च अधिकारी, विभागीय अफसर या बाहरी मध्यस्थ शामिल हैं? STF को अब हाकम के फोन रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजेक्शन और मीटिंग्स की गहन जांच करनी होगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हाकम का पुराना नेटवर्क बहुत विस्तृत था। जमानत के बाद भी उसके संपर्क बरकरार थे। पूछताछ में कई बड़े नाम उभर सकते हैं।

युवाओं में आक्रोश है। देहरादून में परीक्षा केंद्र के बाहर एक अभ्यर्थी ने कहा, “हम मेहनत करते हैं, लेकिन ऐसे माफिया सब बर्बाद कर देते हैं। हाकम जैसे लोग नौकरी के नाम पर लाखों ठग लेते हैं।” मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पहले भी साफ कहा था कि पेपर लीक के किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।

नकल गैंग पर लगाम: पुलिस की सतर्कता

हाकम की गिरफ्तारी के साथ ही एसटीएफ और एसओजी ने नकल गैंग की जड़ों तक पहुंचने का अभियान तेज कर दिया है। साइबर कमांडो पहले से ही संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। आज हो रही यूकेएसएसएससी परीक्षा में कड़े इंतजाम किए गए हैं—सीसीटीवी, जेबर स्कैनर और फ्लाइंग स्क्वायड तैनात हैं। पुलिस का दावा है कि हाकम के गिरोह की ‘छटपटाहट’ अब खत्म हो जाएगी।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि नकल माफिया को जड़ से उखाड़ने के लिए आयोग की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना जरूरी है। भविष्य की परीक्षाओं में डिजिटल पेपर सिस्टम और सख्त सत्यापन ही असली हथियार साबित हो सकता है। हाकम की पूछताछ से जो भी खुलासे होंगे, वे उत्तराखंड की भर्ती प्रक्रिया को नई दिशा दे सकते हैं।

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