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रिटायर्ड जज ने पेश की मिसाल: तलाक के बाद बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ किया स्वागत

रिटायर्ड जज ने पेश की मिसाल: तलाक के बाद बेटी का ढोल-नगाड़ों के साथ किया स्वागत

देहरादून। देशभर में इन दिनों उत्तराखंड कैडर के एक रिटायर्ड जज का अनोखा कदम चर्चा का विषय बना हुआ है। ज्ञानेंद्र शर्मा ने सामाजिक धारणाओं को चुनौती देते हुए तलाक के बाद अपनी बेटी का उसी खुशी और सम्मान के साथ घर में स्वागत किया, जैसे कभी उसकी विदाई की थी।

मूल रूप से मेरठ निवासी ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपनी बेटी प्रणिता को फैमिली कोर्ट से घर लाते समय ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया। इस दौरान पूरे परिवार ने ‘I Love My Daughter’ लिखी टी-शर्ट पहनकर बेटी के प्रति अपने स्नेह और समर्थन का सार्वजनिक प्रदर्शन किया।

ज्ञानेंद्र शर्मा ने बताया कि जब उनकी बेटी का जन्म हुआ था, तब परिवार ने उसका जोरदार स्वागत किया था। उसी भावना को दोहराने के लिए उन्होंने यह कदम उठाया, ताकि बेटी को यह एहसास हो सके कि उसका महत्व आज भी उतना ही है।

उन्होंने कहा कि उन्होंने बेटी को शादी के समय खुशी-खुशी विदा किया था, लेकिन ससुराल में वह खुश नहीं रह सकी। ऐसे में उसे जबरन वहां रहने के लिए मजबूर करना गलत होता। उनका मानना है कि “बेटी कभी पराई नहीं होती और उसका सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए।”

जानकारी के अनुसार, प्रणिता की शादी वर्ष 2018 में शाहजहांपुर के एक परिवार में हुई थी। बीते वर्षों में उसने मानसिक और भावनात्मक कठिनाइयों का सामना किया, जिसके बाद परिवार ने उसे सम्मानपूर्वक वापस घर लाने का निर्णय लिया।

ज्ञानेंद्र शर्मा ने महिला सशक्तिकरण पर शोध किया है और इस विषय पर पुस्तक भी लिखी है। उनका कहना है कि महिला सशक्तिकरण केवल विचारों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे व्यवहार में भी उतारना जरूरी है।

उन्होंने अपने करियर के बारे में बताया कि उन्होंने एलएलबी के बाद न्यायिक सेवा में प्रवेश किया और उत्तर प्रदेश से होते हुए उत्तराखंड कैडर में कार्य किया। वे जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद से सेवानिवृत्त हुए और उत्तराखंड न्यायिक अकादमी में निदेशक के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

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