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प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कार्यालय में तोड़फोड़-मारपीट मामले में एक हिस्ट्रीशीटर सहित 4 गिरफ्तार

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक कार्यालय में तोड़फोड़-मारपीट मामले में एक हिस्ट्रीशीटर सहित 4 गिरफ्तार

देहरादून। उत्तराखंड में चल रहे प्रारंभिक शिक्षा निदेशक मारपीट विवाद में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। रायपुर थाना पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने, मारपीट, तोड़फोड़ और अन्य गंभीर आरोपों में चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। इनमें एक हिस्ट्रीशीटर अरविंद पुंडीर उर्फ कल्ली भी शामिल है। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।

क्या है पूरा मामला?

घटना शनिवार को रायपुर क्षेत्र के ननूरखेड़ा स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के निदेशक कार्यालय में हुई। भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थक रायपुर क्षेत्र में एक विद्यालय का नाम निशुल्क भूमि दान करने वाले दाताओं के नाम पर रखने के मुद्दे पर चर्चा के लिए पहुंचे थे। वार्ता के दौरान विवाद बढ़ गया और कुछ लोगों ने कार्यालय में अराजकता फैलाई। कुर्सियां, फर्नीचर और अन्य सामान इधर-उधर फेंककर तोड़फोड़ की गई। इस दौरान मौजूद कुछ लोगों को चोटें भी आईं।

प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल ने थाना रायपुर में तहरीर दी, जिसमें विधायक उमेश शर्मा काऊ और कुछ अज्ञात लोगों पर आरोप लगाए गए। उनकी शिकायत पर बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया, जिसमें लोक सेवक के कार्य में बाधा डालना, चोट पहुंचाना, बलवा, संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, जान से मारने की धमकी और गाली-गलौज शामिल हैं। दूसरी ओर, विधायक की सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल सुशील रमोला की तहरीर पर भी मुकदमा दर्ज हुआ। इसमें निदेशालय के कुछ अज्ञात कर्मचारियों पर चोट पहुंचाने, परिरोध करने, हमला करने और अपमानजनक व्यवहार का आरोप है।

पुलिस की कार्रवाई

थाना रायपुर प्रभारी गिरीश नेगी ने बताया कि घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, प्राप्त साक्ष्य और वीडियो फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान की गई। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में अरविंद पुंडीर उर्फ कल्ली (हिस्ट्रीशीटर), लक्ष्मण नवानी, राकेश थपलियाल और अक्षय राणा शामिल हैं। चारों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने बताया कि जांच अभी जारी है और मामले में अन्य संलिप्त लोगों की तलाश की जा रही है।

राजनीतिक हलचल जारी

यह घटना उत्तराखंड की राजनीति में तनाव का कारण बनी हुई है। विपक्षी दल कांग्रेस इसे कानून-व्यवस्था की विफलता बताकर सरकार पर हमला बोल रही है, जबकि भाजपा के भीतर भी इस मामले को लेकर असंतोष की आवाजें उठ रही हैं। विधायक उमेश शर्मा काऊ पहले से ही इस प्रकरण में घिरे हुए हैं और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग की जा रही है।

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