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ये हैं भारतीय रेल इतिहास के सबसे बड़े हादसे, दिल दहलाने वाले थे मौत के आंकड़े

ये हैं भारतीय रेल इतिहास के सबसे बड़े हादसे, दिल दहलाने वाले थे मौत के आंकड़े

ये हैं भारतीय रेल इतिहास के सबसे बड़े हादसे, दिल दहलाने वाले थे मौत के आंकड़े पहाड़ समाचार editor

भारतीय रेलवे के इतिहास में कई भीषण हादसे हुए हैं। इन रेल हादसों में कितनी जानें गई उसका आंकड़ा भयावह है। ऐसा ही एक और हादसा ओडिया में हुआ है। इस हादसे में अब तक 238 मौतें हो चुकी हैं। यह आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। ओडिशा रेल हादसे में अब तक 238 लोगों की मौत हो चुकी है। आशंका जताई जा रही है कि मौत का ये आंकडा और बढ़ सकता है।

रेल इतिहास के सबसे भीषण हादसे 

छह जून, 1981 को देश में सबसे बड़ी रेल दुर्घटना हुई थी। इस तारीख को बिहार में पुल पार करते समय एक ट्रेन बागमती नदी में गिर गई थी, जिसमें 750 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।

20 अगस्त, 1995 को फिरोजाबाद के पास पुरुषोत्तम एक्सप्रेस खड़ी कालिंदी एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस घटना में 305 लोगों की मौत हुई थी।

26 नवंबर, 1998 को जम्मू तवी-सियालदह एक्सप्रेस पंजाब के खन्ना में फ्रंटियर गोल्डन टेंपल मेल के पटरी से उतरे तीन डिब्बों से टकरा गई थी, जिसमें 212 लोगों की मौत हो गई थी।

दो अगस्त, 1999 को गैसल ट्रेन दुर्घटना हुई थी, इस हादसे में ब्रह्मपुत्र मेल उत्तर सीमांत रेलवे के कटिहार डिवीजन के गैसल स्टेशन पर अवध असम एक्सप्रेस से टकरा गई थी। इस दुर्घटना में 285 से अधिक लोगों की मौत हुई थी और 300 से अधिक घायल हो गए। पीड़ितों में सेना, बीएसएफ और सीआरपीएफ के जवान शामिल थे।

20 नवंबर, 2016 को पुखरायां ट्रेन पटरी से उतर गई थी। इस हादसे में 152 लोगों की मौत हो गई थी और 260 घायल हो गए थे।

9 सितंबर, 2002 को रफीगंज ट्रेन हादसा- हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस रफीगंज में धावे नदी पर एक पुल के ऊपर पटरी से उतर गई थी, जिसमें 140 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

23 दिसंबर, 1964 को पंबन-धनुस्कोडि पैसेंजर ट्रेन रामेश्वरम चक्रवात का शिकार हो गई थी, जिससे ट्रेन मे सवार 126 से अधिक यात्रियों की मौत हो गई।

28 मई, 2010 को जनेश्वरी एक्सप्रेस ट्रेन पटरी से उतर गई थी। मुंबई जाने वाली ट्रेन झारग्राम के पास पटरी से उतर गई थी और फिर एक मालगाड़ी से टकरा गई थी, जिससे 148 यात्रियों की मौत हो गई थी।

ये हैं भारतीय रेल इतिहास के सबसे बड़े हादसे, दिल दहलाने वाले थे मौत के आंकड़े पहाड़ समाचार editor

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