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द्रौपदी का डांडा-2 में दफन हो गई थी जिंदग, एक साल बाद मिला पर्वतारोही का शव

द्रौपदी का डांडा-2 में दफन हो गई थी जिंदग, एक साल बाद मिला पर्वतारोही का शव

द्रौपदी का डांडा-2 में दफन हो गई थी जिंदग, एक साल बाद मिला पर्वतारोही का शव

उत्तरकाशी: पिपछले साल 4 अक्टबूर को एक ऐसा भीषण हादसा हुआ था, जिसमें पलक झपकते ही 27 पर्वतारोहियों की जान चली गई थी। उस हादसे में दो पर्वतारोही लापता थे। उन्हीं लापता पर्वतारोहियों में से एक का शव आज बर्फ के नीचे दबा मिला। जबकि, एक अब भी लापता है।

द्रौपदी का डांडा-2 में हुआ ये भीषण हिमस्खलन हादसा नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) के इतिहास का सबसे बुरा हादसा है। इस हादसे ने निम को कभी ना भूलने वाला दिया। निम के 34 प्रशिक्षुओं का दल द्रौपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आ गया था जिसमें कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी।

वहीं, दो लोग उत्तराखंड से नौसेना में नाविक विनय पंवार व हिमाचल निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक वशिष्ट लापता चल रहे थे। एक शव मिला है, लेकिन अभी शिनाख्त नहीं हो पाई है। शव को जिला अस्पताल उत्तरकाशी लाया जा रहा है। इस दर्दनाक हादसे में एवरेस्ट विजेता उत्तरकाशी की बेटी सविता कंसवाल और पर्वतारोही नौमी रावत को खोया था।

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