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किताब लीक मामले में FIR दर्ज, राहुल गांधी बोले-नरवणे पर भरोसा, किताब से सरकार असहज

किताब लीक मामले में FIR दर्ज, राहुल गांधी बोले-नरवणे पर भरोसा, किताब से सरकार असहज

नई दिल्ली। पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज मुकुंद नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के कथित लीक होने पर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की स्पेशल सेल इस बात की तफ्तीश कर रही है कि किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सोशल मीडिया, व्हाट्सएप और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर कैसे प्रसारित हुई, जबकि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है और रक्षा मंत्रालय से आवश्यक मंजूरी लंबित है।

विवाद तब और तेज हो गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में किताब के कुछ अंशों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सरकार पर 2020 के गलवान घाटी संघर्ष के दौरान स्पष्ट निर्देश न देने का आरोप लगाया। राहुल गांधी ने एक हार्डकॉपी भी दिखाई और इसे ‘गिफ्ट’ करने की बात कही, जिससे सदन में हंगामा हुआ।

राहुल गांधी का तीखा हमला

संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा, “या तो जनरल नरवणे झूठ बोल रहे हैं या फिर प्रकाशक पेंग्विन झूठ बोल रहा है। मुझे नहीं लगता कि पूर्व सेना प्रमुख झूठ बोलेंगे।” उन्होंने जनरल नरवणे के 2023 के एक ट्वीट का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने किताब को उपलब्ध बताते हुए खरीदने की अपील की थी। राहुल ने दावा किया कि किताब अमेजन पर भी उपलब्ध है। उन्होंने आगे कहा, “मुझे पेंग्विन पर नहीं, बल्कि पूर्व सेना प्रमुख पर विश्वास है। मेरी राय है कि नरवणे ने किताब में जो बातें लिखी हैं, वे सरकार और प्रधानमंत्री के लिए असुविधाजनक हैं। इसलिए सरकार असहज हो गई है।”

पेंग्विन रैंडम हाउस का स्पष्टीकरण

प्रकाशक पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने सोमवार को बयान जारी कर साफ किया कि ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ के प्रकाशन के एकमात्र अधिकार उनके पास हैं और किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है। कंपनी ने कहा कि प्रिंट या डिजिटल रूप में कोई कॉपी सार्वजनिक नहीं की गई है। किसी भी अनधिकृत प्रसार को कॉपीराइट उल्लंघन बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

पुलिस जांच का दायरा

दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया और न्यूज प्लेटफॉर्म्स पर मिली जानकारी के आधार पर FIR दर्ज की है। जांच में लीक का स्रोत, प्रसार का तरीका और संभावित सुरक्षा/कॉपीराइट उल्लंघन पर फोकस है। किताब 2024 से रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है, जिसके कारण प्रकाशन में देरी हो रही है।

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