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बजट सत्र 2026: संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण शुरू

बजट सत्र 2026: संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण शुरू

नई दिल्ली: संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है, जिसकी शुरुआत लोकसभा में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से हुई। राष्ट्रपति को संसद परिसर पहुंचने पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत किया।

इस सत्र में 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश किया जाएगा, जबकि 1 फरवरी को वित्त मंत्री केंद्रीय बजट 2026-27 सदन में रखेंगे। बजट सत्र कुल 65 दिनों तक चलेगा और इसमें 30 बैठकें होंगी, जो 2 अप्रैल को समाप्त होगा। दोनों सदन 13 फरवरी को ब्रेक के लिए स्थगित हो जाएंगे और 9 मार्च को फिर से शुरू होंगे, ताकि संसदीय स्थायी समितियां विभिन्न मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की जांच कर सकें।

सत्र शुरू होने के साथ ही महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के प्लेन क्रैश में निधन की खबर ने पूरे राजनीतिक माहौल को गहरा शोक में डाल दिया। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि अजित पवार उनके करीबी दोस्त थे और पारिवारिक संबंध भी थे, उनका जाना बहुत बड़ा नुकसान है। केंद्रीय मंत्री सीआर पाटिल ने इसे महाराष्ट्र की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया, जबकि गिरिराज सिंह ने इसे सोशल और पॉलिटिकल दोनों क्षेत्रों के लिए दुखद घटना करार दिया और कहा कि पिछले दशकों में ऐसी घटना नहीं देखी गई।

विपक्षी दलों ने बजट सत्र से अपनी उम्मीदें और मांगें भी स्पष्ट कर दी हैं। बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने कहा कि बजट में संघीय ढांचे को मजबूत करने, ओडिशा के इंफ्रास्ट्रक्चर, रेलवे, स्पेशल फंड और कानून-व्यवस्था सुधार के लिए विशेष प्रावधान होने चाहिए। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने एसआईआर के जरिए वोट चोरी, जम्मू-कश्मीर के मुद्दे, रुपये की गिरती कीमत और अर्थव्यवस्था की स्थिति पर चर्चा की मांग की।

कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने दिल्ली में वायु प्रदूषण, रुपये की गिरावट और समाज को बांटने वाले मुद्दों पर सरकार से संवेदनशीलता की अपेक्षा की। समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव ने यूजीसी की नई गाइडलाइंस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ये नियम समाज के सभी वर्गों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं और मुट्ठी भर लोगों के हितों को सीमित करने के लिए हैं।

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