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यूनेस्को धरोहर ‘रम्माण’ मेले में उमड़ा जनसैलाब, सलूड-डूंगरा गांव बना सांस्कृतिक केंद्र

यूनेस्को धरोहर ‘रम्माण’ मेले में उमड़ा जनसैलाब, सलूड-डूंगरा गांव बना सांस्कृतिक केंद्र

चमोली जनपद के सलूड-डूंगरा गांव में विश्व प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहर रम्माण मेले का भव्य आयोजन कड़ी सुरक्षा और व्यापक व्यवस्थाओं के बीच संपन्न हुआ। रामायण की मूल कथा और उत्तराखंड की पारंपरिक मुखौटा शैली पर आधारित इस अद्वितीय लोकनाट्य को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे।

इस अवसर पर जिलाधिकारी गौरव कुमार और पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पंवार मुख्य रूप से मौजूद रहे। आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। अधिकारियों ने मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए स्थानीय संस्कृति के संरक्षण के प्रयासों की सराहना की।

रम्माण मेला अपनी विशिष्ट प्रस्तुति शैली के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है, जिसमें पारंपरिक वाद्य यंत्रों और स्थानीय शिल्प का विशेष महत्व होता है। आयोजन के दौरान भोजपत्र से निर्मित 18 मुखौटों का उपयोग किया गया, वहीं 12 ढोल, 12 दमाऊ, 18 ताल और 8 भंकोरों की थाप ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। राम जन्म, वनगमन, स्वर्ण मृग वध, सीता हरण और लंका दहन जैसे प्रसंगों का सजीव मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया।

वर्ष 2009 में UNESCO द्वारा रम्माण को विश्व सांस्कृतिक धरोहर का दर्जा दिया गया था। यह आयोजन स्थानीय आराध्य भूम्याल देवता को समर्पित है और उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं का जीवंत उदाहरण है। मेले के दौरान चमोली पुलिस द्वारा सुरक्षा और यातायात के पुख्ता इंतजाम किए गए, जिससे पूरा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे।

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