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‘मौजूदा समय बेहद चुनौतीपूर्ण’ – मन की बात में पीएम मोदी ने US-इजरायल और ईरान युद्ध पर जताई गहरी चिंता

‘मौजूदा समय बेहद चुनौतीपूर्ण’ – मन की बात में पीएम मोदी ने US-इजरायल और ईरान युद्ध पर जताई गहरी चिंता

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज मन की बात के 132वें एपिसोड में पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में चल रहे US-इजरायल बनाम ईरान युद्ध को लेकर देशवासियों से संबोधित करते हुए चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय बेहद चुनौतीपूर्ण है और इस संकट से निपटने के लिए पूरे देश को एकजुट रहना होगा।

पीएम मोदी ने युद्ध की तुलना कोविड-19 जैसी वैश्विक चुनौती से करते हुए कहा कि यह संकट ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर डाल रहा है। उन्होंने जोर दिया कि भारत सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जरूरी कदम उठा रही है।71e9dd

ये कहीं बड़ी बातें

ऊर्जा सुरक्षा पर फोकस: पीएम ने लोकसभा और राज्यसभा में भी युद्ध के प्रभाव का जिक्र किया था। उन्होंने बताया कि भारत पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की सप्लाई सुचारू रखने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव के बावजूद कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा: युद्ध शुरू होने के बाद अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है, जिनमें ईरान से करीब 1,000 (ज्यादातर मेडिकल छात्र) शामिल हैं।

कूटनीतिक प्रयास: पीएम मोदी ने ईरान, इजरायल, अमेरिका और खाड़ी देशों के नेताओं से फोन पर बात की है। उन्होंने बातचीत और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने का समर्थन किया।

जनता से अपील: घबराने की बजाय तैयार रहने और एकजुटता बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि “गंभीर परिणाम” टालने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।

यह युद्ध लगभग एक महीने से जारी है और इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (जिससे दुनिया की बड़ी तेल आपूर्ति होती है) को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। भारत जैसे तेल आयातक देशों पर इसका असर पड़ सकता है।

मन की बात में पीएम मोदी ने अन्य मुद्दों पर भी बात की, लेकिन वेस्ट एशिया संकट को मुख्य फोकस बनाया। उन्होंने देशवासियों से कहा कि चुनौतियों का सामना हम मिलकर करेंगे, जैसा हमने कोविड के समय किया था।

भारत सरकार के कदम:

  • कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की बैठक।
  • मुख्यमंत्रियों के साथ वर्चुअल बैठक।
  • रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व का उपयोग और विविध स्रोतों से आयात।

यह संकट वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों, मुद्रास्फीति और व्यापार को प्रभावित कर रहा है। भारत अपनी विदेश नीति में संतुलन बनाते हुए सभी पक्षों से संपर्क में है।

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