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पांच सितंबर को होगा राघव और राज बिजल्वाण की चौथी पुस्तक का विमोचन, इसलिए है खास

पांच सितंबर को होगा राघव और राज बिजल्वाण की चौथी पुस्तक का विमोचन, इसलिए है खास

मसूरी: मसूरी के दो युवा लेखक, राघव बिजल्वाण और राज बिजल्वाण की चौथी पुस्तक ‘द इकोज़ ऑफ़ लैंडौर: ए रेज़ोनेंट लॉंगिंग’ विमोचन के लिए तैयार है। यह पुस्तक विशेष रूप से मसूरी और लैंडौर के बदलते स्वरूप, बढ़ती चुनौतियों और शहर की आत्मा को बचाने की गहरी चिंता पर केंद्रित है। इस काव्य संग्रह का विमोचन 5 सितंबर को मसूरी में नगर पालिका अध्यक्ष मीरा सकलानी करेंगी।

लेखकों का परिचय और साहित्यिक यात्रा

राघव बिजल्वाण और राज बिजल्वाण ने अपनी शुरुआती शिक्षा हैम्पटन कोर्ट स्कूल, मसूरी से पूरी की है। इसके बाद, दोनों ने ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर (एम.ए.) की डिग्री हासिल की। अपनी अकादमिक प्रतिभा के लिए, राघव को गोल्ड मेडल और राज को सिल्वर मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।

अपनी शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ, दोनों भाइयों ने साहित्य के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने तीन पुस्तकें ‘डिवोशन थ्रू द डार्कनेस’, ‘टाइमलेस टेल्स’ और ‘लॉन्गिंग्स ऑफ़ लैंडौर’ का सह-लेखन किया है, जो मसूरी और लैंडौर के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाती हैं। उनकी लेखनी में इस पहाड़ी शहर के इतिहास, संस्कृति और कालातीत आकर्षण की झलक मिलती है।

वर्तमान में राघव बिजल्वाण , हैम्पटन कोर्ट स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि राज बिजल्वाण भारतीय ज्ञान प्रणाली के क्षेत्र में शोध और अध्ययन कर रहे हैं।

‘द इकोज़ ऑफ़ लैंडौर’ – एक भावनात्मक पुकार

यह नई पुस्तक ‘द इकोज़ ऑफ़ लैंडौर: ए रेज़ोनेंट लॉंगिंग’, पिछली पुस्तक ‘लॉन्गिंग्स ऑफ़ लैंडौर’ की भावना को आगे बढ़ाती है। इस पुस्तक में, लेखक इस बात पर जोर देते हैं कि मसूरी और लैंडौर में हुए बदलावों ने शहर के अस्तित्व को खतरा पहुंचाया है।

पुस्तक दो भागों में विभाजित है: ‘द टेस्टिमनी ऑफ आवर टाइम्स’ और ‘लॉन्गिंग टू बी नेम्ड’। पहला भाग मसूरी के बदलते समय की यात्रा पर ले जाता है, जबकि दूसरा भाग पुरानी यादों और वर्तमान के बीच के संघर्ष को दर्शाता है। यह काव्य संग्रह दिखाता है कि आज का मसूरी वैसा नहीं है जैसा हमारी यादों में है। इसमें दर्द, आंसू, और शहर को बचाने की एक गहरी अपील समाहित है।

लेखकों का मानना है कि भले ही मसूरी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन सुरंग के अंत में प्रकाश अवश्य है। यह पुस्तक न केवल मसूरी के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती है, बल्कि शहर के भविष्य के लिए एक उम्मीद और एक पुकार भी है।

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